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मानसिक रोग के लकà¥à¤·à¤£
विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का इस संबंध में कहना है कि जब à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं और वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° पर काबू नहीं रहता, तो à¤à¤¸à¥€ हालत को मानसिक रोग कहते हैं। मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समठनहीं पाता और उसे रोजमरà¥à¤°à¤¾ के काम ठीक से करने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल होती है। मानसिक रोग के लकà¥à¤·à¤£, हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निरà¥à¤à¤° करते हैं कि उसके हालात कैसे हैं और उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। कà¥à¤› लोगों में इसके लकà¥à¤·à¤£ लंबे समय तक रहते हैं और साफ नजर आते हैं, जबकि कà¥à¤› लोगों में शायद थोड़े समय के लिठहों और साफ नजर न आà¤à¤‚।
मानसिक रोग किसी को à¤à¥€ हो सकता है, फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—। हालांकि किसी को मानसिक रोग होने का कारण यह नहीं कि उसमें कोई दोष है। मानसिक रोग पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ समाज में à¤à¤• कमजोर वरà¥à¤— का गठन करता है तथा जिसे हमारे समाज में à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ की तरह जाना जाता है। जो लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं, उसका असर उनके नजदीकी लोगों पर à¤à¥€ पड़ता है।
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